तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥ तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥ किया उपद्रव तारक भारी । जय वृषभान कुंवारी श्री श्यामा । कीरति नंदिनी शोभा धामा ॥ नित्य विहारिणी श्याम अधर । प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥ By your https://baglamukhishabarmantra77643.blogdigy.com/helping-the-others-realize-the-advantages-of-chalisa-37285597